Magh Gupt Navratri 2026 Begins: Date, Shubh Muhurat, Puja Timing and Spiritual Significance Explained-m.khaskhabar.com
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इस तिथि से शुरू होगी माघ गुप्त नवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

khaskhabar.com: शनिवार, 17 जनवरी 2026 11:23 AM (IST)
इस तिथि से शुरू होगी माघ गुप्त नवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में नवरात्रि को शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण काल माना जाता है। वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से होगी और इसका समापन 27 जनवरी को नवमी तिथि के साथ होगा। इन नौ दिनों में साधक विशेष रूप से मां दुर्गा की गुप्त साधना करते हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त:
पंचांग के अनुसार माघ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन यानी 19 जनवरी 2026 को घट स्थापना और पूजा के लिए प्रातः काल का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। सुबह 6 बजकर 43 मिनट से 10 बजकर 24 मिनट तक कलश स्थापना का उत्तम योग रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त भी इस दिन उपलब्ध रहेगा, जो 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इस समय में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
माघ गुप्त नवरात्रि का महत्व:
माघ गुप्त नवरात्रि का सीधा संबंध दस महाविद्याओं की साधना से माना जाता है। यह नवरात्रि तंत्र, मंत्र और साधना से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शीत ऋतु के दौरान आने वाली यह नवरात्रि बसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मां दुर्गा की गुप्त आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और साधक को मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि जितनी गोपनीयता से साधना की जाती है, उतना ही अधिक उसका प्रभाव देखने को मिलता है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि:
गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थान को स्वच्छ कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें। फूल, अक्षत और मन से मां के मंत्रों का जाप करें। इस दौरान दुर्गा सप्तशती या देवी से संबंधित पाठ का मन ही मन पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के अंत में मां की आरती कर उनसे अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगते हुए आशीर्वाद प्राप्त करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता और सटीकता का हम दावा नहीं करते। किसी भी विशेष पूजा या निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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