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कुमाऊं का दूसरा सबसे बड़ा वैष्णवी शक्तिपीठ है मां दूनागिरी मंदिर, जानें पौराणिक कथा

मां दूनागिरी मंदिर, में मां दुर्गा के वैष्णवी रूप (मां दूनागिरी देवी) की पिंडी रूप में पूजा की जाती है। इसे कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ माना जाता है।
रामायण का इतिहास रामायण और महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। इसके अनुसार, जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने वास्ते द्रोणागिरी पर्वत को ले जा रहे थे, तब इस पर्वत का एक हिस्सा यहां गिरा था। ऐसा भी कहा जाता है कि पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने यहां तपस्या की थी।
भारत के ज्यादातर देवी मंदिर में नारियल फोडने की प्रथा रहती है, लेकिन इस मंदिर ऐसा नहीं किया जाता है। दरअसल, यहां चढ़ाए जाने वाले प्रसाद (सूखे नारियल) को तोड़ा नहीं जाता है, बल्कि श्रद्धालुओं को साबुत वापस दिया जाता है। मंदिर परिसर में निरंतर भंडारे का आयोजन किया जाता है।
--आईएएनएस
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