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जानिए हरिद्वार के प्राचीन 'मां दक्षिण काली मंदिर' का महत्व, जिसे देख सीएम धामी भी हुए निहाल

यह मंदिर हरिद्वार में नील पर्वत की तलहटी और गंगा की 'नीलधारा' के तट पर स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर आस्था, शक्ति और रहस्य का अद्भुत संगम है। यह प्राचीन मंदिर सीधे तौर पर मां महाकाली को समर्पित है।
माता रानी के मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता काफी प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने के बाद भगवान शिव ने विष का प्रभाव कम करने के लिए यहीं गंगा में स्नान किया था। यहां पर गंगा मैया की धारा दक्षिण की ओर (दक्षिण वाहिनी) मुड़ जाती है। यही कारण है कि मंदिर का नाम 'दक्षिण काली मंदिर' पड़ा। हालांकि मंदिर में माता काली की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर ही है।
मंदिर की स्थापना 108 नरमुंडों पर की गई थी और गर्भगृह में देवी काली, शिवलिंग और भैरव बाबा की प्रतिमाएं स्थापित है। इसी के साथ ही, यहां पर उत्तर भारत की सबसे बड़ी 'अखंड धूना' (अखंड ज्वाला) प्रज्वलित है।
--आईएएनएस
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