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गणेश चतुर्थी 2026: जानिए देश के उन प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां सबसे भव्य होता है उत्सव

khaskhabar.com: शनिवार, 12 सितम्बर 2026 4:23 PM (IST)
गणेश चतुर्थी 2026: जानिए देश के उन प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां सबसे भव्य होता है उत्सव
नई दिल्ली । ढोल-नगाड़ों की थाप, फूलों की सजावट और बप्पा के जयघोष के साथ पूरा देश बप्पा का स्वागत करने के लिए तैयार है। पहले यह त्योहार महाराष्ट्र के आसपास प्रदेशों में प्रसिद्ध था, लेकिन धीरे-धीरे पूरे देश में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने लगा। चलिए आपको बताते हैं भारत के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में, जहां गणेश चतुर्थी का जश्न सबसे ज्यादा भव्य और धूमधाम से मनाया जाता है। सिद्धिविनायक मंदिर : मुंबई का यह प्रसिद्ध मंदिर भगवान गणेश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। प्रभादेवी में स्थित इस मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। विशेष अनुष्ठान, मंत्रोच्चार और महाआरती का आयोजन होता है। मंदिर का मुख्य आकर्षण बप्पा की मूर्ति है, जिसकी विशेषता इसकी सूंड का दाहिनी ओर झुका होना है। मूर्ति के चार हाथ (चतुर्भुज) हैं, जिनमें से ऊपरी दाहिने हाथ में कमल, ऊपरी बाएं हाथ में एक छोटी कुल्हाड़ी, निचले दाहिने हाथ में पवित्र माला और निचले बाएं हाथ में मोदक से भरा एक कटोरा है। मोदक श्री सिद्धिविनायक का परम प्रिय व्यंजन है।
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर: पुणे (महाराष्ट्र) स्थित यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध गणेश मंदिरों में से एक माना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान इस मंदिर में देश के प्रसिद्ध मंदिरों या महलों की हूबहू प्रतिकृति बनाई जाती है। इस साल वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर की अद्भुत झांकी सजाई जाएगी। आम दिनों में मंदिर तय समय पर बंद होता है, लेकिन गणेश उत्सव के दौरान यह भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है। इस मंदिर की स्थापना 19वीं सदी में एक समृद्ध मिठाई विक्रेता (हलवाई) श्री दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने की थी, जिन्होंने प्लेग महामारी में अपने इकलौते बेटे को खो दिया था। शोक से उबरने के लिए उन्होंने भगवान गणेश की शरण ली। स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने यहीं के सार्वजनिक गणेशोत्सव से प्रेरित होकर देश को एकजुट करने के लिए इसे बड़े पैमाने पर मनाने की शुरुआत की थी।
रणथंभौर गणेश मंदिर (सवाई माधोपुर, राजस्थान): गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर इस मंदिर में विशाल लक्खी मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में भगवान गणेश की मूर्ति में तीन नेत्र (त्रिनेत्र) हैं और यहां पर गजानन को निमंत्रण भेजने की परंपरा है। यह देश के चुनिंदा मंदिरों में है, जहां गणेश पत्नी रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ के साथ-साथ अपने वाहन मूषक के साथ विराजमान हैं। कहा जाता है कि यहां की मूर्ति मनुष्य द्वारा नहीं बनाई गई, बल्कि यह स्वयं प्रकट (स्वयंभू) हुई है।
कनिपकम विनायक मंदिर (चित्तूर, आंध्र प्रदेश): गणेश चतुर्थी के दिन से इस मंदिर में भव्य वार्षिक ब्रहोत्सव की शुरुआत होती है, जो 20 दिनों तक चलता है। उत्सव के इन दिनों में भगवान गणेश की उत्सवमूर्ति (राजकीय प्रतिमा) को अलग-अलग प्रकार के रंग-बिरंगे और पारंपरिक वाहनों (वाहन सेवा) पर सजाकर पूरे क्षेत्र में भव्य फेरी निकाली जाती है। यहां स्थापित स्वयंभू (स्वयं प्रकट) गणेश मूर्ति के बारे में मान्यता है कि इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। कहा जाता है कि पचास साल पहले चढ़ाया गया चांदी का कवच अब मूर्ति पर फिट नहीं बैठता है।
इस कनिपकम विनायक मंदिर को आपसी विवाद सुलझाने और सत्य की परख के लिए भी जाना जाता है, जहां भक्त भगवान की शपथ लेकर अपने मतभेद दूर करते हैं।
--आईएएनएस

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