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दूर्वा गणेश चतुर्थी आज: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और भद्रा का समय

सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। इस दिन गणपति की पूजा के दौरान दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता माना गया है। इसी कारण भक्त अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और कार्यों में सफलता की कामना के साथ गणेश जी की आराधना करते हैं।
दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान गणेश का ध्यान करते हैं। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा की जाती है। पूजा में दूर्वा, सिंदूर, मोदक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। दिनभर व्रत रखने के बाद श्रद्धानुसार भगवान गणेश की आरती और पूजा की जाती है।
कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी चतुर्थी तिथि
पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 15 अगस्त 2026 को शाम करीब 5 बजकर 28 मिनट से शुरू हुई और 16 अगस्त को शाम करीब 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत 16 अगस्त को रखा जा रहा है।
राजस्थान के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के अंतर के कारण पूजा तथा अन्य मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए राजस्थान के जैसलमेर के पंचांग में चतुर्थी तिथि 16 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट तक बताई गई है।
गणेश पूजा का शुभ समय
दूर्वा गणपति चतुर्थी के दिन गणेश पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष महत्व रखता है। राजस्थान के पंचांग के अनुसार जैसलमेर में 16 अगस्त को गणेश पूजा का समय सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक बताया गया है। उदयपुर में यह समय सुबह 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 1 बजकर 57 मिनट तक है। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय स्थान के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
जयपुर सहित राजस्थान के अन्य शहरों में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय गणना को प्राथमिकता देना अधिक उचित रहता है।
आज का शुभ समय
16 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त, प्रातः संध्या, अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त जैसे कई शुभ समय बताए गए हैं। राजस्थान के जैसलमेर के पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक, प्रातः संध्या 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 1 मिनट से 3 बजकर 54 मिनट तक बताया गया है।
इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी दिन में बने रहने की जानकारी पंचांग में दी गई है। इन योगों का समय भी स्थान के अनुसार कुछ अलग हो सकता है, इसलिए पूजा या किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आज का राहुकाल
रविवार होने के कारण 16 अगस्त को राहुकाल शाम के समय रहेगा। राजस्थान के अलग-अलग स्थानों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर के कारण इसकी अवधि में कुछ मिनटों का अंतर दिखाई देता है। जैसलमेर के पंचांग में राहुकाल शाम 5 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 23 मिनट तक बताया गया है, जबकि जयपुर की स्थानीय गणना में यह लगभग शाम 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक बताया गया है।
राहुकाल को परंपरागत रूप से नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हालांकि पहले से निर्धारित पूजा या धार्मिक व्रत के संबंध में अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार निर्णय लेना उचित रहेगा।
आज भद्रा का समय
16 अगस्त को भद्रा का समय भी पंचांग में दिया गया है। जैसलमेर की स्थानीय गणना के अनुसार भद्रा सुबह 6 बजकर 18 मिनट से शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चतुर्थी तिथि भी इसी समय के आसपास समाप्त होती है।
भद्रा के समय को लेकर विभिन्न स्थानों के पंचांग में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए अपने शहर के अनुसार पंचांग देखना आवश्यक है।
गणेश पूजा में दूर्वा का महत्व
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा को विशेष स्थान दिया गया है। गणेश भक्त श्रद्धा के साथ दूर्वा अर्पित करते हैं और इसे पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसके साथ सिंदूर, मोदक और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई गणेश आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त अपने कार्यों की सफलता के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
दूर्वा गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और मंदिरों में गणेश पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हैं। शाम के समय आरती और भजन के साथ पूजा संपन्न करने की परंपरा भी है।
महत्वपूर्ण सूचना: पूजा, राहुकाल, भद्रा और अन्य मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनटों तक अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। ऊपर दिए गए समय राजस्थान के उपलब्ध पंचांग स्रोतों के आधार पर दिए गए हैं।
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