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महाभारत काल का साक्षी है, देहरादून का लाखामंडल शिव मंदिर, आज भी मिलते हैं अवशेष

इस मदिंर के अंदर आपको पार्वती जी के पैरों के निशान भी देखने को मिलते। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में अगर किसी शव को इन द्वारपालों के सामने रखकर मंदिर के पुजारी उस पर पवित्र जल छिड़कें तो वह मृत व्यक्ति कुछ समय के लिए फिर से जीवित हो उठता है। गंगाजल ग्रहण करते ही उसकी आत्मा फिर से शरीर त्यागकर चली जाती है लेकिन इस बात का रहस्य क्या है यह आज तक कोई नहीं जान पाया।
इस इलाके के आसपास पत्थर से बने सैकड़ों शिवलिंग मिलते हैं। साथ ही, यह भी बताया जाता है कि जल अर्पित करने के बाद शिवलिंग शीशे की तरह चमकने लगता है।
मान्यता है कि इसी जगह कौरवों ने पांडवों व उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए ही लाक्षागृह (लाख का घर) का निर्माण कराया था।बताया जाता हैं कि लाखामंडल में वह ऐतिहासिक गुफा आज भी मौजूद है, जिससे होकर पांडव सकुशल बाहर निकल आए थे। इसके बाद पांडवों ने 'चक्रनगरी' में एक माह बिताया, जिसे आज चकराता कहते हैं। लाखामंडल के अलावा हनोल, थैना व मैंद्रथ में खुदाई के दौरान मिले पौराणिक शिवलिंग व मूर्तियां इस बात की गवाह हैं कि इस क्षेत्र में पांडवों का वास रहा है।
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