स्नोखर भागलपुर में भागवत कथा का भक्तिमय रस बरसा, सत्य और सत्संग का संदेश देकर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
अपने उद्बोधन में महाराज श्री ने ईर्ष्या और द्वेष जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने अत्यंत सरल और प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मच्छर बाहर से काटता है, वैसे ही मत्सर (ईर्ष्या) मनुष्य को भीतर से खोखला कर देता है। मच्छर से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग किया जा सकता है, किंतु मन के भीतर बसे मत्सर से मुक्ति केवल सत्संग, भक्ति और सद्विचारों के माध्यम से ही संभव है।
कथा के साथ-साथ प्रस्तुत हुए भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भगवान के नाम-स्मरण और संकीर्तन में डूबे भक्तजन ताली बजाते हुए भक्ति भाव में झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए। संपूर्ण वातावरण जयकारों और हरिनाम संकीर्तन से गूंज उठा, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं ने दिव्य आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
कार्यक्रम के अंत में पूज्य महाराज श्री ने कथा महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सभी श्रद्धालुओं, आयोजकों एवं सहयोगियों को आशीर्वचन प्रदान किए। साथ ही इस धार्मिक आयोजन के समाचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए खास खबर डॉट कॉम जयपुर परिवार के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव आगामी दिनों में भी भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का ऐसा ही अमृत बरसाता रहेगा, जिसकी प्रतीक्षा श्रद्धालुओं को उत्सुकता से है।
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