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एक ऐसा मंदिर जहां आज भी ब्रह्मचारी रूप में तपस्या कर रहे हैं भगवान शिव

सबरीमाला मंदिर को दक्षिण का तीर्थस्थल भी कहा जाता है। इस मंदिर में आने वाले की धर्म, जाति और वर्ग मायने नहीं रखता है। किसी भी वर्ग और जाति का पुरुष मंदिर में दीक्षा ले सकता है। मंदिर में सिर्फ भगवान अयप्पा के दर्शन से आशीर्वाद नहीं मिलता। माना जाता है कि शारीरिक और मानसिक तपस्या के बाद ही भगवान अयप्पा प्रसन्न होकर भक्त को आशीर्वाद देते हैं। मंदिर तपस्या और आस्था दोनों पर आधारित है।
सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के अंत में एक रहस्यमयी ज्योति भी जलाई जाती है, जिसके दर्शन के लिए लाखों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं। इस उत्सव को मकरविलक्कु कहते हैं। मकरविलक्कु उत्सव में पहाड़ी पर ज्योत जलाने के बाद भगवान अयप्पा के लिए जुलूस भी निकाला जाता है। -आईएएनएस
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