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महाकाल मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य, दर्शन करने पहुंचे मनोरंजन जगत के दिग्गज

सभी सेलेब्स भस्म आरती में विशेष रूप से शामिल हुए और शिव भक्ति के पावन सानिध्य का आनंद लिया। साथ ही, मंदिर के नंदी हाल में बैठकर बाबा की भक्ति में लीन नजर आए।
अभिनेत्री अक्षरा सिंह अपनी मां के साथ गई थीं। भस्म आरती के अलौकिक दृश्य और शिव की महिमा को देख वे इस कदर भावविभोर हो गईं कि उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। दर्शन के बाद अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि बाबा के दर्शन करने के बाद उन्हें असीम आत्मिक शांति का अनुभव हुआ और यह उनके जीवन के सबसे अद्भुत एवं अविस्मरणीय क्षणों में से एक रहेगा। उन्होंने कहा, "पिछली दो साल से लगातार आ रही हूं और अर्जी लगा रही हूं। इस बार बाबा ने फिर से मुझे बुला लिया।"
प्रसिद्ध वेब सीरीज 'रक्तांचल 3' की स्टारकास्ट अभिनेता क्रांति प्रकाश झा और निकितन धीर भी बाबा के दरबार में पहुंचे। सीरीज की सफलता और नए सीजन के शुभारंभ से पहले उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद अभिनेता क्रांति झा ने आईएएनएस के साथ बातचीत की।
उन्होंने कहा, "सबसे पहले जय श्री महाकाल। आज मैं बहुत भावुक हूं और मेरे पास खुशी को बयां करने के लिए शब्द ही नहीं है। महाकाल की कृपा ही है, जो उनके दर्शन हो जाते हैं। बस एक कमी महसूस हो रही है कि मेरी मां मेरे साथ नहीं हैं। उनकी यहां आने की बहुत इच्छा थी। महाकाल की कृपा रही तो अगली बार मैं उन्हें भी अपने साथ जरूर लेकर आऊंगा। मैं भगवान शिव को प्रणाम करता हूं। प्रशासन और सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतरीन इंतजाम किए हैं, जिससे दर्शन करने आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होती। अच्छी सुविधा के लिए मैं यहां के प्रशासन को धन्यवाद देना चाहूंगा।"
वहीं, अभिनेता निकितिन धीर ने कहा, "बाबा महाकाल को सारी इच्छा पहले से ही पता है। मैं यहां सिर्फ उनके दर्शन करने आया हूं, यहां मैंने बस हर पल को दिल से महसूस किया है। यह ऐसा स्थान है, जहां आकर हर श्रद्धालु भावुक हो जाता है। मैं अपने मन के भाव शब्दों के माध्यम से बयां नहीं कर पा रहा हूं। ऐसा मेरा साथ बहुत कम होता है लेकिन आज सच में मैं अपनी भावनाओं को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं। यहां आकर मुझे एक अलग ही ऊर्जा और गहरा सुकून महसूस हुआ।"
अभिनेता चंदन रॉय ने भी दर्शन के बाद आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि यह उनकी उज्जैन की तीसरी यात्रा है। उन्होंने कहा, "महाकाल के दर्शन करते ही मन मुग्ध हो जाता है। यहां की व्यवस्थाएं बेहद सराहनीय हैं। बिना किसी शोरगुल और भीड़भाड़ के बहुत ही व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जाते हैं।"
उन्होंने मंदिर प्रशासन और व्यवस्थापकों का आभार जताते हुए कहा कि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसी ही सुलभ व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।
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