डायनासोर के समय का है उड़ीसा का ये प्राकृतिक मेहराब, विदेशी पर्यटक भी होते हैं आकर्षक

भारतीय भूवैज्ञानिक की मानें तो अंडाकार आकार के इस मेहराब की आधार लंबाई 30 मीटर और ऊंचाई 12 मीटर है। प्राकृतिक मेहराब के आले की अधिकतम ऊंचाई 7 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है, जो इसे बाकी चट्टानों से अलग और अनोखा बनाती है। लगभग 16 करोड़ साल से ज्यादा पुरानी मेहराब न सिर्फ अपने बनाव के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके तार हमारे पुराणों से भी जुड़े हैं।
माना जाता है कि भगवान राम द्वारा स्वर्ण हिरण के शिकार के दौरान चलाए गए बाण ने चट्टान में एक छेद बना दिया, जिसे मेहराब माना जाता है, और वह बाण पहाड़ी के दूसरी ओर जा गिरा। छेंगा पहाड़ पर बना मेहराब सुंदरगढ़ जिले के हेमगिर में स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए ट्रैकिंग करनी पड़ती है और आस-पास किसी तरह की सुविधा भी नहीं मिलेगी।
पहाड़ों पर होने की वजह से अगर आप इस जगह का दौरा करना चाहते हैं तो अपनी जरूरत का सामान साथ में लेकर जाएं। ट्रैकिंग के साथ-साथ पर्यटकों को यहां प्रकृति के अद्भुत नजारे भी देखने को मिल जाते हैं। हालांकि यहां बारिश के समय में न जाने की सलाह दी जाती है और ऐसे स्थान पर अकेले जाने से भी बचें।
--आईएएनएस
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