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वडोदरा के छात्रों का कमाल: समुद्र के पानी से ढूंढ निकाला ऐसा बैक्टीरिया, जो खुद पैदा करता है रोशनी

अर्णव और हरिओम ने अपनी रिसर्च से न सिर्फ अपने कॉलेज, बल्कि पूरे वडोदरा को गौरवान्वित किया है, साथ ही युवा छात्रों को भी प्रेरित किया है। अमीन कॉलेज के विद्यार्थी अर्णव ढमढेरे ने बताया कि हर्बल साइंस के ओपन हाउस में स्कूल के विद्यार्थियों को बुलाया जाता है। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया को आइसोलेट करने का हमारा प्राइमरी उद्देश्य कुछ अलग करके दिखाने का था। पढ़ाई के दौरान हमें पता चला कि बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया की वजह से रात को समुद्र चमकता है। इस बैक्टीरिया की खोज करने की यही वजह है।
अर्णव ने बताया कि हरिओम समुद्र के पानी को ले आया। हमें बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया मिले हैं। यह बैक्टीरिया काफी काम का है। अमीन कॉलेज के विद्यार्थी हरिओम पाठक ने बताया कि बीते एक वर्ष से इस पर काम कर रहे हैं। इस बैक्टीरिया के खोज की हमारी कोशिश थी। हमें रिफाइन और पहचान करने के लिए एक वर्ष का समय लगा। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया खारे पानी में जिंदा रहता है। इस बैक्टीरिया को पहचानने में छह महीने का समय लगा। छोटी-छोटी समस्याओं की वजह से हमको इसकी पहचान करने में ज्यादा वक्त लगा।
प्रोफेसर ने बताया कि हमने विद्यार्थियों को पूरी तरह से सपोर्ट किया है। रिसर्च के लिए उनको जिस भी चीज की आवश्यकता हुई, हमने उपलब्ध कराए। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया लिक्विड बनाने के काम आएंगे। इसके लिए हम भी कोशिश करने वाले हैं। कहीं-कही टेस्टिंग या डायग्नोसिस के लिए भी इसका यूज कर रहे हैं। हमारी भी कोशिश रहेगी इसको करने की।
बता दें कि प्रोफेसर देवर्षि गज्जर और डॉ. प्रिया मिश्रा के मार्गदर्शन में हुई इस रिसर्च में इन छात्रों ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी क्षेत्र से समुद्री जल के नमूने जुटाए और उसमें मौजूद इस खास बैक्टीरिया का आइसोलेशन कर स्टडी की। करीब 11 महीनों की कड़ी मेहनत, प्रयोगशाला में सटीक प्रयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किए गए इस रिसर्च ने आखिरकार यह महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार लगातार शोध और नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिससे अर्णव और हरिओम जैसे युवा वैज्ञानिकों को सफलता के नए आयाम स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया का उपयोग भविष्य में प्रदूषण की निगरानी, मेडिकल रिसर्च और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में किया जा सकता है। फिलहाल, इनका पैथोलॉजिकल एनालिसिस जारी है, जिसके बाद इनके व्यापक उपयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। - IANS
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