Bundi Travel Guide: A Complete 3 Day Budget Trip Itinerary to Rajasthan Hidden Gem-m.khaskhabar.com
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Oct 14, 2026 10:42 pm
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   राजस्थान और हरियाणा सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
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अरावली की गोद में बसा ऐतिहासिक शहर: हवेलियों और सुंदर बावड़ियों का बूंदी

khaskhabar.com: शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 09:27 AM (IST)
राजस्थान की बात होते ही आमतौर पर ज़हन में जयपुर के ऐतिहासिक किले, उदयपुर की झीलें या जैसलमेर के रेगिस्तान की तस्वीर उभरती है। लेकिन अरावली की सुंदर पहाड़ियों की गोद में बसा बूंदी शहर अपनी एक अलग ही छटा बिखेरता है। विशेषकर अक्टूबर के सुहावने मौसम में, जब हल्की ठंड की शुरुआत होती है, यह शहर पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। नीली दीवारों वाले पारंपरिक मकान, स्थापत्य कला से समृद्ध पुरानी हवेलियाँ और पत्थरों में तराशी गई अद्वितीय बावड़ियों के कारण बूंदी को राजस्थान का एक छिपा हुआ रत्न माना जाता है। यदि आप कम बजट में किसी शांत और ऐतिहासिक जगह का आनंद लेना चाहते हैं, तो महज 4,000 से 5,000 रुपये के बजट में बूंदी की यह 3 दिन की यात्रा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। जानिए किस तरह आप इस खूबसूरत शहर को तीन दिनों में आसानी से एक्सप्लोर कर सकते हैं।
पहला दिन: विशाल किला, राजसी महल और झील के किनारे ढलती शाम
बूंदी पहुँचने पर सबसे पहले नवल सागर झील के समीप स्थित पुराने शहर की गलियों में किसी सुंदर हेरिटेज होमस्टे में ठहराव किया जा सकता है। इन पारंपरिक हवेलियों में रुकने से प्राचीन राजस्थानी स्थापत्य कला का जीवंत अनुभव मिलता है। इसके बाद अरावली की ऊँची पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक तारागढ़ किले और गढ़ पैलेस की सैर के लिए निकला जा सकता है।
गढ़ पैलेस की 'चित्रशाला' दुनिया भर में अपनी अनूठी पेंटिंग्स और प्राकृतिक रंगों के प्रयोग के लिए जानी जाती है। यहाँ की दीवारों पर बनी बारीक कलाकृतियाँ भारतीय कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। शाम ढलते समय नवल सागर झील के तट पर बैठना एक शांत और सुखद अनुभव देता है, जहाँ पानी में महल की पड़ती परछाईं दिनभर की थकान मिटा देती है।
दूसरा दिन: नक्काशीदार बावड़ियाँ, ऐतिहासिक धरोहरें और लज़ीज़ ज़ायका
दूसरे दिन की शुरुआत बूंदी की सबसे प्रसिद्ध पहचान 'रानी जी की बावड़ी' से की जा सकती है। ज़मीन की गहराई में उतरती सीढ़ियाँ और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी प्राचीन वास्तुकला की उत्कृष्टता को दर्शाती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थल बेहद खास है।
इसके बाद धाभाई कुंड, 84 खंभों की छतरी और जैत सागर झील के तट की सैर की जा सकती है। शाम के समय बूंदी के स्थानीय बाज़ारों में घूमते हुए यहाँ के स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है, जो किफ़ायती होने के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब होता है।
तीसरा दिन: प्राकृतिक झरने की ठंडक और प्राचीन रॉक आर्ट
तीसरे और अंतिम दिन शहर के शोर-गुल से दूर प्रकृति के बीच समय बिताया जा सकता है। इसके लिए बूंदी शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित 'भीम लत महादेव वॉटरफॉल' और 'गरदड़ा रॉक पेंटिंग' देखना बेहतरीन विकल्प है। अक्टूबर के मौसम में झरने के आसपास फैली हरियाली और गिरता पानी मनमोहक नज़ारा पेश करता है, वहीं प्राचीन रॉक आर्ट इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
बजट और यात्रा का पूरा गणित
किफ़ायती और सुविधाजनक तरीक़े से बूंदी घूमने के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएँ सबसे बेहतर रहती हैं:

ठहरने की व्यवस्था:
नवल सागर झील और गढ़ पैलेस के आसपास 600 से 1,000 रुपये प्रति दिन के बजट में साफ़-सुथरे हेरिटेज होमस्टे या गेस्ट हाउस आसानी से मिल जाते हैं।
लोकल ट्रांसपोर्ट: बूंदी की संकरी गलियों और दर्शनीय स्थलों को एक्सप्लोर करने के लिए स्कूटी रेंट पर लेना सबसे सुविधाजनक रहता है, जिसका किराया लगभग 400 रुपये प्रति दिन होता है।
खान-पान: यहाँ का भोजन बेहद स्वादिष्ट और किफ़ायती है। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये में बेहतरीन राजस्थानी और स्थानीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।

बूंदी पहुँचने के आसान रास्ते

ट्रेन द्वारा: बूंदी रेलवे स्टेशन के लिए सीधी ट्रेन ली जा सकती है। इसके अलावा कोटा जंक्शन यहाँ का सबसे नज़दीकी और बड़ा रेलवे स्टेशन है, जो महज 35 किलोमीटर दूर है। कोटा से बस या टैक्सी के ज़रिए 40 से 50 मिनट में बूंदी पहुँचा जा सकता है।

हवाई जहाज़ द्वारा:
सबसे समीपस्थ हवाई अड्डा जयपुर का सांगानेर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, जो यहाँ से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जयपुर से टैक्सी या बस सेवा आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
इतिहास, कला और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर बूंदी शहर उन सभी यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है जो राजस्थान के पारंपरिक वैभव को करीब से देखना चाहते हैं।

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