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अनासागर झील संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार को अवमानना कार्रवाई की चेतावनी

khaskhabar.com: गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025 11:58 AM (IST)
अनासागर झील संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार को अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
अजमेर/नई दिल्ली। राजस्थान के अजमेर स्थित ऐतिहासिक अनासागर झील की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। जस्टिस अभय ओखा और जस्टिस उज्ज्वल भूयान की पीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि "राज्य सरकार झील संरक्षण को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।" अदालत ने मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) की रिपोर्ट को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि "हमें आदेशों का अनुपालन चाहिए, बहाने नहीं।" साथ ही, न्यायालय ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अधिकारी अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर भी उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि "अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कौन होती है इस अदालत को निर्देश देने वाली?" कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "NGT के 21 दिसंबर 2022 के आदेश के बावजूद अनासागर झील के आसपास फुटपाथ और अन्य निर्माण कार्य कैसे हुए?" अदालत ने आश्चर्य जताया कि अजमेर की प्राकृतिक सुंदरता को नष्ट कर स्मार्ट सिटी बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है।
राज्य सरकार को जवाब देने के निर्देश
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि झील के आसपास अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि "इसका क्या प्रमाण है और सेवन वंडर्स पार्क के खिलाफ क्या कदम उठाए गए?"
मुख्य सचिव को 17 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि "यदि सरकार और अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड इसी तरह गुमराह करती रही तो हम अवमानना कार्यवाही शुरू करेंगे।" इसके साथ ही, राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को 17 मार्च 2025 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता अशोक मलिक स्वयं अदालत में पेश हुए, जबकि सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिव मंगल सिंह ने पैरवी की। अब 17 मार्च 2025 को अगली सुनवाई होगी, जिसमें राज्य सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर अनासागर झील की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?

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