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आकाश बायजूस ने लड़कियों के सशक्तीकरण के लिए लॉन्च किया ‘एजुकेशन फॉर ऑल’

khaskhabar.com : बुधवार, 10 अगस्त 2022 2:36 PM (IST)
आकाश बायजूस ने लड़कियों के सशक्तीकरण के लिए लॉन्च किया ‘एजुकेशन फॉर ऑल’
जयपुर । भारत सरकार की ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ पहल के मौके पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले अग्रणी संस्थान आकाश बायजूस ने ‘एजुकेशन फॉर ऑल’ के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए निजी कोचिंग में छात्राओं के सशक्तीकरण एवं समावेशन के लिए बड़ी पहल का एलान किया है। इसके तहत वंचित परिवारों के 7वीं से 12वीं कक्षा के करीब 2000 छात्रों, विशेषरूप से लड़कियों को नीट एवं जेईई की निशुल्क कोचिंग एवं स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी।

दिल्ली के एयरोसिटी में जेडब्ल्यू मैरिएट होटल में मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ देश में 45 स्थानों पर एक साथ इस पहल की लॉन्चिंग की गई।

इस प्रोजेक्ट के तहत चयनित छात्र आकाश बायजूस के नेशनल टैलेंट हंट एक्जाम – 2022 (एएनटीएचई 2022) में हिस्सा लेंगे। यह संस्थान की फ्लैगशिप स्कॉलरशिप परीक्षा है, जो देशभर में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से 5 से 13 नवंबर तक आयोजित की जाएगी। टॉप 2,000 छात्रों को नीट एवं आईआईटी-जेईई के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय कोचिंग प्रोग्राम में शुमार आकाश बायजूस की निशुल्क कोचिंग का मौका मिलेगा।

लाभार्थी छात्रों की पहचान के लिए आकाश कुछ चुनिंदा एनजीओ के साथ साझेदारी करेगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर तबके के छात्रों, परिवार में इकलौती लड़की और सिंगल पैरेंट (मां) वाले बच्चों को नॉमिनेट करेंगे। पूरे भारत में आकाश बायजूस के करीब 285 से ज्यादा सेंटर हैं और यह देश के किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट की सर्वाधिक शाखाएं हैं। हर सेंटर पर औसतन 9 क्लासेज होती हैं।

‘एजुकेशन फॉर ऑल’ पहल को लेकर आकाश बायजूस के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश चौधरी ने कहा, ‘इस इंडस्ट्री में इतने समय से कार्य करते हुए हमने अनुभव किया कि हमारे देश में लगातार मेडिकल एवं इंजीनियरिंग को लेकर महत्वाकांक्षा बढ़ रही है। हमारे युवा इन दोनों क्षेत्रों में स्वयं के विकास एवं सामाजिक योगदान को लेकर मौजूद संभावनाओं और अवसरों को समझ रहे हैं। हालांकि ऐसे लाखों छात्र हैं जिनके लिए निजी कोचिंग संस्थानों में जाना संभव नहीं होता है, जबकि ऐसी कोचिंग प्रवेश परीक्षा पास करने की उनकी संभावना को बढ़ा सकती है। लड़कियों के मामले में मुश्किल और भी बढ़ जाती है, क्योंकि बहुत से परिवार लड़कियों की शिक्षा पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते हैं। इस कारण से वंचित समुदाय के छात्रों, विशेषरूप से लड़कियों के लिए मौके और भी कम हो जाते हैं।

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