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फिल्म समीक्षा—ब्रह्मास्त्र—वीएफएक्स का जबरदस्त कमाल, दर्शक हुए कायल

khaskhabar.com : शुक्रवार, 09 सितम्बर 2022 4:10 PM (IST)
फिल्म समीक्षा—ब्रह्मास्त्र—वीएफएक्स का जबरदस्त कमाल, दर्शक हुए कायल
—राजेश कुमार भगताणी

प्रमुख कलाकार—रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, अमिताभ बच्चन, नागार्जुन अक्किनेनी, मौनी राय और विशेष भूमिका में शाहरुख खान
निर्माता—करण जौहर
निर्देशक—अयान मुखर्जी
अवधि—166 मिनट

लम्बे समय से अपने प्रदर्शन को तरसती अयान मुखर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ब्रह्मास्त्र पार्ट 1—शिवा सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो गई। करीब 9 साल से इस फिल्म पर काम कर रहे अयान मुखर्जी ने इसे तीन हिस्सों में बनाने की बात कही है। इसका पहला भाग शिवा, जो नाम के अनुरूप शिवा की कहानी है। अयान ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि यह फिल्म भारतीय पौराणिक कहानियों से प्रेरित है जिसे आधुनिक दुनिया में आधुनिक किरदारों के साथ सेट किया गया है। यह प्राचीन शास्त्रों में वर्णित अस्त्रों की काल्पनिक कहानी पर आधारित है।

वेक अप सिड और ये जवानी है दीवानी फिल्म के बाद से अयान अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ब्रह्मास्त्र पर काम कर रहे हैं। उन्होंने पौराणिकता के साथ आधुनिकता को जोड़ कर ब्रह्मास्त्र की दुनिया गढ़ी है। हालांकि उन पर हॉलीवुड की सुपर पावर आधारित फिल्मों का प्रभाव फिल्म में साफ झलकता है। यही वजह है कि फिल्म का एक्शन कहीं-कहीं हॉलीवुड फिल्म एवेंजर्स की याद दिलाता है जिसमें किरदारों के पास सुपरपावर होती है और एकदूसरे की रक्षा के लिए उन शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।

अयान मुखर्जी फिल्म के स्क्रीनप्ले को ताकतवर नहीं बना पाए हैं। 2 घंटे 46 मिनट लम्बी इस फिल्म की यह सबसे बड़ी कमजोरी है। इसके साथ ही इसके संवाद भी प्रभाव नहीं छोड़ते हैं। शुरूआत धीमी है, नागार्जुन के किरदार के सामने आने के बाद इसमें गति आती है। यहाँ पर अयान ने शेट्टी के किरदार को समाप्त कर दिया है, जबकि शेट्टी के किरदार को विस्तार देने की जरूरत थी। फिल्म के चेजिंग सीन रोमांचक हैं। पटकथा की कमी का एक नमूना हमें फिल्म में जुनून के साथी रिवाल्वर लेकर चलते हैं, इससे मिलता है। जिनके पास अपनी शक्तियाँ हैं उन्हें रिवाल्वर की क्या जरूरत। यह बात भी हजम नहीं होती। अयान ने भारतीय सिनेमा में पहली बार अस्त्रवर्स यानी अस्त्रों की दुनिया बनाने की बात कही है, लेकिन फिल्म का कोई सिग्नेचर ट्यून नहीं बनाया है जो ब्रह्मास्त्र की पहचान बने। गीत-संगीत के मामले में भी फिल्म औसत रही है। इसके साथ ही अयान क्लाइमैक्स को प्रभावी नहीं बना पाए हैं। फिल्म का अन्त दर्शकों में उसके दूसरे भाग के लिए जिज्ञासा जगाने वाला होना चाहिए था, जैसा कि राजामौली ने बाहुबली के अन्त में कट्टपा ने बाहुबली को क्यों मारा दिखाया था, की तरह दूसरे पार्ट के लिए कोई जिज्ञासा छोडऩे में कामयाब नहीं रहती है। इसी तरह से अयान ने शिवा का अपनी शक्तियों को जागृत करने के दृश्य को बहुत लम्बा खींचा है।

बात अगर सितारों के अभिनय की करें तो रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की प्रेम कहानी में कोई नयापन नजर नहीं आता है। असल जिंदगी में पति पत्नी रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की जोड़ी स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री रंग नहीं जमा पाई है। फिल्म में शिवा का अपनी शक्तियों को जागृत करने वाला सीन लंबा हो गया है। गुरुजी के किरदार में अमिताभ बच्चन को समुचित स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन उनके किरदार में अधूरापन है। पूरी फिल्म में अभिनय के मामले में शाहरुख खान अपनी छोटी सी भूमिका में दूसरे सितारों पर खासे भारी पड़े हैं।
मेहमान भूमिका में आई डिंपल कपाडिय़ा का किरदार भी अविकसित है। ऐसा शायद इसलिए भी है कि तीन हिस्सों में बनने के कारण इनके किरदारों को अगले पार्ट में विस्तार मिले। मौनी रॉय का किरदार मार्वल फिल्म के किरदार स्कारलेट विच जैसा लगता है। बस यहां पर उसे काले कपड़े पहनाकर लाल रंग की आंखें दे दी गई हैं। खलनायिका के इस किरदार के लिए सशक्त कलाकार की जरूरत थी।

फिल्म के वीएफएक्स पर अयान ने 150 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, उन दृश्यों में की गई मेहनत झलकती है लेकिन वे वैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं जो हॉलीवुड की एवेंजर्स सीरीज में नजर आया था।

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