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द्वेष में न बदलने दें बच्चों की प्रतिस्पर्धा, जरा-सी चूक से होता है भविष्य खराब

khaskhabar.com : शनिवार, 30 जुलाई 2022 3:03 PM (IST)
द्वेष में न बदलने दें बच्चों की प्रतिस्पर्धा, जरा-सी चूक से होता है भविष्य खराब
आपने हमने सब ने देखा है कि घर में यदि दो या उससे ज्यादा बच्चेे हैं तो उनमें किसी भी काम को लेकर प्रतिस्पर्धा रहती है। यह प्रतिस्पर्धा अच्छी बात है। इससे बच्चों में स्वयं को आगे रखने की आदत हो जाती है, वे कहीं भी किसी भी काम में स्वयं को पीछे रखना पसन्द नहीं करते हैं। फिर वह पढ़ाई हो, खेलकूद हो या घर पर माँ के काम में हाथ बंटाना हो। यह प्रतिस्पर्धा उनके सीखने की ललक और आगे बढऩे की चाह को दर्शाती है। इस प्रतिस्पर्धा को प्रतिस्पर्धा तक ही सीमित रखें, कहीं ऐसा न हो कि यह प्रतिस्पर्धा आपके बच्चों में द्वेष का रूप ले ले, जिसके चलते उनका भविष्य खराब हो जाए। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के जोश को कम ना करते हुए उनके मन में द्वेष भाव को ना पनपने दे। एक-दूसरे से प्रतियोगिता करना अच्छी बात है लेकिन इसकी भी एक सीमा है।
बच्चों की आपसी प्रतिस्पर्धा द्वेष में न बदले आइए डालते हैं एक नजर—

बच्चों की खूबियां गिनवाएं

एक बच्चे को उसकी खामी की वजह से गलत शब्दों का प्रयोग करने की बजाए उसे उसके अंदर छुपी खूबी के लिए शाबाशी दें। हो सकता है किसी दिन दोनों बच्चों में से एक बच्चे के अच्छे नंबर नहीं आए हों, तो इस स्थिति में अच्छे नंबर लाने वाले बच्चे की प्रशंसा करने के साथ साथ दूसरे बच्चे की कमी न निकालें बल्कि उसे भी उसकी किसी पिछली उपलब्धियों के बारे में शाबाशी दें।

एक दूसरे से तुलना न करें
बच्चे जैसा देखते और महसूस करते हैं वैसा ही वह व्यवहार करने लगते हैं। इसलिए सबसे पहले आपको खुद में यह बदलाव करना होगा कि आप उनकी एक दूसरे से तुलना न करें। अगर आप उन्हें यह समझाएंगे कि वह एक दूसरे से किसी चीज में अच्छे या बुरे हैं तो वह हमेशा दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए बच्चों की तारीफ करें तुलना नहीं।

अपने बच्चों को चीजों को स्पष्ट करना सिखाएँ। उन्हें यह पता होना चाहिए कि अगर उनके भाई या बहन पढ़ाई में उनसे कमजोर हैं तो यह उनकी कमजोरी नहीं है बल्कि हो सकता है वह खेल कूद आदि में तेज हों। इसलिए किसी एक चीज को लेकर उनकी तुलना एक दूसरे से न करें। बल्कि उनकी एक कमजोरी के बदले दूसरी खूबी ढूंढें। ताकि वह एक दूसरे की कमजोरी में उनका साथ दे पाएं।

भावनाओं को समझें
बच्चा अपने आप को दूसरे से श्रेष्ठ तब दिखाता है जब उसे यह महसूस हो कि माता पिता उसकी भावनाओं की कदर नहीं कर रहे हैं या जब उन्हें यह महसूस होता है कि उनकी पूरे परिवार में कोई वैल्यू ही नहीं है। ऐसी स्थिति को अवॉइड करने के लिए उनके मन में क्या चल रहा है इस बारे में बात करें। अगर आपको लगता है कि आप दोनों बच्चों में एक जैसा व्यवहार नहीं कर रहे हैं तो इस बात पर गौर करें।

सीमा तय करें
थोड़ा बहुत मस्ती मजाक हर भाई बहन करते हैं और अगर कभी कभार वह मस्ती करते समय एक दूसरे की टांग खींच लेते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन उन्हें उनकी सीमा का पता होना चाहिए। उन्हें बताएं कि मजाक इतना ज्यादा भी नहीं होना चाहिए कि उससे दूसरे बच्चे की भावनाओं को ठेस पहुंचे। अगर दूसरा बच्चा मजाक में रो रहा है या उसे बुरा महसूस हुआ है तो ऐसी गलती या मजाक दोबारा न करने को कहें और इसे एक सबक की तरह प्रयोग करना सिखाएं।

यह लेखक के अपने निजी विचार हैं। जरूरी नहीं है कि आप इनसे सहमत हों।

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