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श्रावणी / हरियाली अमावस्या : शुभ मुर्हूत, पूजा विधि व महत्त्व

khaskhabar.com : बुधवार, 27 जुलाई 2022 10:39 AM (IST)
श्रावणी / हरियाली अमावस्या : शुभ मुर्हूत, पूजा विधि व महत्त्व
कल गुरुवार 28 जुलाई को सावन के महीने के 15 दिन पूरे होने जा रहे हैं। इसी के साथ कल अमावस्या भी है। सावन के महीने में आने वाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या या हरियाली अमावस्या के तौर पर जाना जाता है। श्रावणी अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं, जो शुभ माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा और उपाय देवताओं के साथ पितरों का भी आशीर्वाद दिलाते हैं। हरियाली अमावस्या के दिन व्रत और पितृ तर्पण के साथ ही पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। इसी के साथ इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते जो परेशानियों से छुटकारा दिलाने का काम करते हैं। हम आपको आज हरियाली अमावस्या के शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं—


श्रावणी / हरियाली अमावस्या पूजन विधि
पुराणों के अनुसार, श्रावणी / हरियाली अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद सूर्यदेव को जल दें और पीपल के पेड़ की पूजा करें। शुभ योग में वृक्षारोपण और दान-पुण्य करें। सुहागिन महिलाओं को माता पार्वती और पीपल की पूजा करने के बाद सुहाग सामग्री सुहागिन महिलाओं को देना चाहिए, ऐसा करने से घर-परिवार में सुख-शांति मिलती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पीपल और तुलसी की सुबह-शाम पूजा करनी चाहिए और भोग लगाना चाहिए। पूजा-अर्चना करने के बाद गरीब व जरूरतमंद को भोजन भी करा सकते हैं। वहीं जो लोग श्रावणी / हरियाली अमावस्या का उपवास रख रहे हैं, वे शाम के समय भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त और शुभ योग

श्रावणी / हरियाली अमावस्या की तिथि की शुरुआत 27 जुलाई दिन बुधवार को रात 09 बजकर 11 मिनट से हो जाएगी, जो गुरुवार रात अर्थात् 28 जुलाई की रात 11 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। लेकिन पूजा-पाठ उदया तिथि में मान्य होती है इसलिए श्रावणी / हरियाली अमावस्या की पूजा 28 जुलाई को की जाएगी। इसी दिन व्रत रखा जाएगा और पीपल के पेड़ की पूजा की जाएगी। श्रावणी / हरियाली अमावस्या पर इस बार कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन गुरु पुष्य योग के साथ अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे महायोग उपस्थित हो रहे हैं। इन योग में पूजा-अर्चना करने के शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जो भी शुभ काम इस दिन किए जाएंगे उसमें सफलता मिलेगी।

श्रावणी / हरियाली अमावस्या का महत्व
नारद पुराण के अनुसार, श्रावणी / हरियाली अमावस्या के दिन पितृ श्राद्ध, दान, तर्पण विधि और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है और भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करते हैं। साथ ही इस दिन वृक्षारोपण करने से ग्रह दोष शांत होते हैं। अगर सुहागन महिला इस दिन व्रत रखती हैं तो उनको शिव-पार्वती की तरफ से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष और शनि का प्रकोप है तो उनको इस दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए और दान-पुण्य करना चाहिए। साथ ही श्रावणी / हरियाली अमावस्या की शाम को नदी या मंदिर में दीप दान करने का भी विधान बताया गया है।


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